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पंजाब में भीषण बाढ़: 1900 गांव प्रभावित, 4 लाख एकड़ फसल डूबी, 43 मौतें

पंजाब में भीषण बाढ़ का कहर: भारी बारिश और बांधों से छोड़े गए पानी ने बढ़ाई मुश्किलें

पंजाब इस समय भीषण बाढ़ की मार झेल रहा है। इस साल का मानसून पिछले कई वर्षों की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक साबित हुआ है। भारतीय मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर भारत ने हाल ही में 14 सालों में सबसे अधिक बारिश वाला पखवाड़ा देखा है। सामान्य से कहीं अधिक वर्षा होने के कारण पंजाब के हालात बिगड़ गए और राज्य के कई जिले पानी में डूब गए।

बाढ़ से हुए नुकसान

ताज़ा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 1900 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। इन घटनाओं में लगभग 43 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों लोग बेघर हो गए हैं।

खेती-किसानी को भी गहरा नुकसान पहुंचा है। लगभग चार लाख एकड़ कृषि भूमि पानी में डूबी हुई है, जिससे धान और दूसरी फसलों का नुकसान होना तय माना जा रहा है। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, 30–35 लाख से अधिक लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं और हजारों परिवारों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है।

आपदा के पीछे कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार बाढ़ के पीछे कई वजहें रहीं—

भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड ने जानकारी दी कि पानी का प्रवाह एक समय पर 95,000 क्यूसेक तक पहुंच गया था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए 80,000 से अधिक क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसके चलते रोपड़, नंगल और आनंदपुर साहिब सहित कई गांवों में हालात और गंभीर हो गए। सरकार ने राहत कार्यों के मद्देनज़र स्कूलों को बंद करने के आदेश दिए और राज्य को आपदा प्रभावित घोषित कर दिया।

राहत व बचाव अभियान

बचाव कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं। एनडीआरएफ, बीएसएफ और वायुसेना की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को निकाल रही हैं। अब तक हजारों ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। केवल गुरदासपुर इलाके में ही 5,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया।

पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने राहत कार्यों की समीक्षा की। वहीं, कई सामाजिक संगठन और स्वयंसेवक भी मदद के लिए आगे आए हैं। अभिनेता रणदीप हुड्डा भी प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाते नज़र आए।

सरकार और राजनीति

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार से मांग की है कि राज्य को तुरंत आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रति एकड़ कम से कम ₹50,000 का मुआवज़ा दिया जाए।

दूसरी ओर, कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने इस आपदा को “मानव निर्मित संकट” बताते हुए सरकारों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि नदी प्रबंधन और बांधों की निगरानी बेहतर होती तो नुकसान इतना बड़ा नहीं होता।

मुख्यमंत्री मान बीमारी के कारण कुछ इलाकों का दौरा नहीं कर पाए, जिसकी वजह से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को खुद राहत क्षेत्रों का जायज़ा लेना पड़ा।


निष्कर्ष

पंजाब की मौजूदा बाढ़ को पिछले कई दशकों की सबसे बड़ी आपदा माना जा रहा है। सैकड़ों गांव डूबे, लाखों एकड़ जमीन बर्बाद हुई और दर्जनों लोगों की जान गई—यह संकट राज्य की कृषि और बुनियादी ढांचे पर गहरा असर डाल रहा है।

इस समय सबसे बड़ी ज़रूरत है—तेज़ राहत कार्य, प्रभावित किसानों को पर्याप्त मुआवज़ा, और भविष्य के लिए ठोस बाढ़ नियंत्रण उपाय। बिना दीर्घकालिक योजना के, ऐसी आपदाएं आगे भी पंजाब की मुश्किलें बढ़ाती रहेंगी।

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