नेपाल में सोशल मीडिया बैन पर बवाल: Gen Z सड़कों पर, हिंसक झड़पों में कई की मौत

नेपाल में विरोध प्रदर्शनों की लहर: सोशल मीडिया बैन के खिलाफ युवा सड़क पर

नेपाल की राजधानी काठमांडू हाल के दिनों में भारी अशांति का केंद्र बनी हुई है। सरकार द्वारा अचानक Facebook, Instagram, YouTube, WhatsApp, X (Twitter), Snapchat सहित 25 से अधिक सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर बैन लगाने के फैसले ने देशभर में खासकर युवाओं को उबाल पर ला दिया है।

नेपाल में सोशल मीडिया बैन पर बवाल: Gen Z सड़कों पर, हिंसक झड़पों में कई की मौत

🔹 प्रदर्शन की शुरुआत और घटनाक्रम

  • संसद और सरकारी भवनों के बाहर हजारों युवाओं ने इकट्ठा होकर प्रतिबंध के खिलाफ नारे लगाए।

  • प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े और जगह-जगह झड़पें हुईं।

  • पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस, वाटर कैनन, रबर बुलेट और गोलियों तक का इस्तेमाल किया।

  • रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक 17 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घायल हैं।

  • हालात बिगड़ने पर सरकार ने कुछ इलाकों में कर्फ्यू और सेना की तैनाती का ऐलान किया।

🔹 सरकार का तर्क

सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियां नेपाल में आधिकारिक तौर पर पंजीकृत नहीं हैं और वे फेक न्यूज़, अफवाह और ऑनलाइन अपराधों पर अंकुश लगाने में सहयोग नहीं कर रही थीं। इसलिए, यह कदम “कानून और व्यवस्था” बनाए रखने के लिए ज़रूरी था।

🔹 युवाओं का विरोध

वहीं, युवा पीढ़ी—खासतौर पर Gen Z—ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया।
वे लगातार “Stop the ban, save democracy” जैसे नारे लगा रहे हैं। उनके अनुसार सरकार असली मुद्दों जैसे भ्रष्टाचार और बेरोजगारी से ध्यान हटाने के लिए यह कदम उठा रही है।

🔹 व्यापक असंतोष के कारण

यह विरोध केवल सोशल मीडिया बैन तक सीमित नहीं है। यह नेपाल की गहरी राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं की झलक भी है—

नेपाल में सोशल मीडिया बैन पर बवाल: Gen Z सड़कों पर, हिंसक झड़पों में कई की मौत

  • लगातार बदलती सरकारें

  • भ्रष्टाचार के आरोप

  • रोजगार और आर्थिक अवसरों की कमी

  • लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसे की कमी

🔹 अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस फैसले की आलोचना हो रही है। मानवाधिकार संगठनों ने इसे डिजिटल सेंसरशिप और मानवाधिकारों का उल्लंघन करार दिया है।

🔹 निष्कर्ष

नेपाल के ये प्रदर्शन यह साफ़ दिखाते हैं कि डिजिटल युग में स्वतंत्रता और सरकारी नियंत्रण की टकराहट कितनी गंभीर हो सकती है।
सोशल मीडिया केवल मनोरंजन या संचार का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक आवाज़ का प्लेटफ़ॉर्म बन चुका है। यदि सरकारें संवाद की बजाय दमन का रास्ता अपनाती हैं, तो यह असंतोष को और भड़का सकता है।

नेपाल का यह संघर्ष भविष्य के लिए चेतावनी है कि आज़ादी और नियंत्रण के बीच संतुलन बनाना हर लोकतांत्रिक समाज के लिए ज़रूरी है।

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