90% ट्रेडर्स शेयर मार्केट में पैसा गंवा देते हैं,इसके निम्न कारण हो सकते हैं
शेयर बाज़ार बाहर से देखने में बेहद आकर्षक लगता है। सोशल मीडिया पर हर दिन कोई न कोई अपने मुनाफ़े दिखाता है, जिससे लगता है कि ट्रेडिंग से आसानी से अमीर बना जा सकता है। लेकिन सच्चाई यह है कि 90% ट्रेडर्स लंबे समय में पैसा खो देते हैं। आखिर ऐसा क्यों होता है? आइए जानते हैं इसके मुख्य कारण।
1. ज्ञान और शिक्षा की कमी
ज़्यादातर लोग बिना सही जानकारी के शेयर मार्केट में कदम रख देते हैं। वे दोस्तों, टीवी चैनलों या सोशल मीडिया से मिले “टिप्स” पर भरोसा करते हैं, लेकिन खुद रिसर्च नहीं करते। जबकि ट्रेडिंग केवल “सस्ता खरीदो और महंगा बेचो” का खेल नहीं है, इसमें तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis), रिस्क मैनेजमेंट और मार्केट साइकॉलजी की गहरी समझ ज़रूरी होती है। बिना मजबूत नींव के नुकसान होना तय है।

2. अतिविश्वास और जल्दी अमीर बनने की चाह
कई नए ट्रेडर्स मान लेते हैं कि वे जल्दी अमीर बन जाएंगे। यह अतिविश्वास उन्हें ज़्यादा जोखिम लेने पर मजबूर करता है। वे बिना अनुशासन के ट्रेड करते हैं और सोचते हैं कि हमेशा मार्केट को मात दे देंगे। लेकिन हकीकत में एक बड़ा गलत ट्रेड उनकी सारी मेहनत और पूंजी डुबो सकता है।
3. रिस्क मैनेजमेंट की अनदेखी
सफल ट्रेडिंग का सबसे बड़ा नियम है – पूंजी की रक्षा करना। लेकिन अधिकतर ट्रेडर्स स्टॉप-लॉस का इस्तेमाल नहीं करते और एक ही ट्रेड में बड़ी रकम लगा देते हैं। जब बाज़ार उनके खिलाफ़ जाता है, तो भारी नुकसान झेलना पड़ता है। जबकि सफल ट्रेडर्स हमेशा अपने नुकसान को छोटा और मुनाफ़े को बड़ा रखने की रणनीति अपनाते हैं।
4. भावनात्मक ट्रेडिंग
शेयर बाज़ार में सबसे बड़ी बाधा होती है – डर और लालच।
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डर की वजह से लोग अपने मुनाफ़े वाले ट्रेड जल्दी बंद कर देते हैं।
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लालच की वजह से घाटे वाले ट्रेड को लंबे समय तक पकड़े रहते हैं, यह सोचकर कि शायद मार्केट वापस ऊपर आ जाएगा।
इस तरह भावनाओं के आधार पर लिए गए फैसले लगातार नुकसान का कारण बनते हैं।
5. ट्रेंड्स और टिप्स के पीछे भागना
कई ट्रेडर्स बिना सोचे-समझे “हॉट स्टॉक” या टीवी पर आई खबरों के पीछे भागते हैं। हकीकत यह है कि जब तक आम निवेशक को कोई टिप मिलती है, तब तक बड़े खिलाड़ी पहले ही एंट्री लेकर बाहर निकल चुके होते हैं। नतीजा – रिटेल ट्रेडर्स महंगे दाम पर खरीदते हैं और गिरावट के समय बेचते हैं।
6. धैर्य और अनुशासन की कमी
ट्रेडिंग में धैर्य सबसे ज़रूरी है। लेकिन ज्यादातर लोग हर दिन पैसा कमाना चाहते हैं। इस चाहत में वे बिना वजह कई ट्रेड कर लेते हैं, जिसे “ओवरट्रेडिंग” कहा जाता है। इससे ब्रोकरेज खर्च बढ़ता है, मानसिक दबाव आता है और पूंजी भी घटती है। प्रोफेशनल ट्रेडर्स हमेशा कम लेकिन सही समय पर ट्रेड करते हैं।

7. रिस्क-रिवॉर्ड अनुपात की अनदेखी
एक सफल ट्रेडिंग रणनीति हमेशा रिस्क-रिवॉर्ड अनुपात पर आधारित होती है। उदाहरण के लिए – अगर आप ₹100 का जोखिम लेकर ₹300 कमाते हैं, तो यह अच्छी रणनीति है। लेकिन ज्यादातर लोग ₹300 का जोखिम लेकर सिर्फ ₹100 कमाने की कोशिश करते हैं। लंबी अवधि में यह तरीका निश्चित रूप से घाटे में ही ले जाता है।
8. अवास्तविक अपेक्षाएँ
लोग शेयर बाज़ार को अक्सर लॉटरी समझ लेते हैं। उन्हें लगता है कि एक-दो दिन में ही लाखों कमा लेंगे। लेकिन सच्चाई यह है कि ट्रेडिंग भी एक पेशा है, जिसमें लगातार सीखना, अभ्यास करना और अनुभव हासिल करना पड़ता है। जैसे डॉक्टर या इंजीनियर बनने में सालों लगते हैं, वैसे ही एक सफल ट्रेडर बनने के लिए भी समय और धैर्य चाहिए।
निष्कर्ष
स्पष्ट है कि 90% ट्रेडर्स शेयर बाज़ार में पैसा गंवा देते हैं। वजह बाज़ार की नाइंसाफी नहीं, बल्कि उनकी गलतियाँ हैं – जैसे शिक्षा की कमी, रिस्क मैनेजमेंट का अभाव, भावनात्मक फैसले और अवास्तविक उम्मीदें।
अगर कोई सचमुच सफल ट्रेडर बनना चाहता है, तो उसे ट्रेडिंग को एक गंभीर व्यवसाय की तरह लेना होगा। निरंतर सीखना, रिस्क को सीमित रखना और भावनाओं पर नियंत्रण पाना – यही वो गुण हैं जो किसी को हारने वाले 90% से निकालकर सफल 10% की श्रेणी में ला सकते हैं।
(Disclaimer)
इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह किसी भी प्रकार से वित्तीय सलाह (Financial Advice), निवेश की सिफारिश (Investment Recommendation) या खरीद-बिक्री का सुझाव (Buy/Sell Advice) नहीं है।
शेयर बाज़ार में निवेश या ट्रेडिंग करना जोखिम से जुड़ा हुआ है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी प्रकार का वित्तीय निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) या प्रमाणित विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।